शोध सार :
वाल्मीकि द्वारा विरचित मूल रामायण और माधव कन्दलि, शंकरदेव तथा माधवदेव द्वारा प्राचीन असमीया भाषा में विरचित सप्तकाण्ड रामायण में नायक राम के चरित्र को भिन्न रूपों में प्रदर्शित किया गया है। संस्कृत में वाल्मीकि रामायण के अलावा भी आध्यात्म रामायण, वशिष्ठ रामायण, आनंद रामायण, अगस्त्य रामायण, अद्भूत रामायण आदि रामायण भी हैं । भारत की विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी रामायण मिलते हैं। वाल्मीकि रामायण में सात काण्ड हैं- आदिकाण्ड या बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुंदरकाण्ड, लंकाकाण्ड या युद्धकाण्ड और उत्तरकाण्ड या उत्तराकाण्ड । कई विद्वानों का मानना है कि प्रारंभ में रामायण में केवल पाँच ही काण्ड थे, आदिकाण्ड और उत्तरकाण्ड बाद की रचना है । मूल संस्कृत रामायण में राम को भगवन् विष्णु के अवतार के रूप में दिखाने का किसी प्रकार का प्रयास वाल्मीकि के द्वारा नहीं किया गया है। जबकि असमीया रामायण के आदिकाण्ड में राम को माधवदेव ने विष्णु के अवतार के रूप में दिखाया है। वाल्मीकि ने अयोध्या काण्ड में राम के अनेकानेक गुणों का वर्णन किया है; जबकि असमीया रामायण में ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं देता।
बीजशब्दः शंकरदेव, माधव कन्दलि, राम, विष्णु
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