About the Journal

शोध-चिंतन पत्रिका सहयोगी विद्वानों द्वारा पुनरीक्षित अर्धवार्षिक हिंदी शोध ई-पत्रिका है । यह पत्रिका कला एवं मानविकी पर हो रहे मानक शोधों को इलेकट्रनिक माध्यम के जरिए प्रकाशित तथा पाठक वर्ग तक सहजता से पहुँचाने का एक मंच है । साथ ही पाठक वर्ग के बीच शोध की मानसिकता को प्रोत्साहन देने का प्रयास है । पत्रिका का पहला अंक जूलाई-दिसंबर, 2020 का है, जिसका प्रकाशन दिसंबर, 2020 में किया गया । 

क्षेत्र (Scope) 

शोध-चिंतन पत्रिका सहयोगी विद्वानों द्वारा पुनरीक्षित पत्रिका है, जिसका उपयोग निःशुल्क  (open access) किया जा सकता है।  शोध-चिंतन पत्रिका को साहित्य और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विचारों के आदान-प्रदान और ज्ञान के हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए प्रकाशित किया गया है। पत्रिका इन क्षेत्रों के शोध से संबंध रखती है। यह पत्रिका कला एवं मानविकी की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए समर्पित है। 

शोध-चिंतन पत्रिका शोध लेखों को स्वीकार करती है। पत्रिका में सहयोगी विद्वानों के पुनरीक्षण प्रक्रिया द्वारा मानक पत्रों का प्रकाशन निश्चित किया जाता है।

पुनरीक्षण नीति (Peer Review Policy )

सहयोगी विद्वानों के पुनरीक्षण का उद्देश्य केवल मानक शोध पत्रों का प्रकाशन करना है। हमारे पुनरीक्षक (Referee) उच्च मानकों के पुनरीक्षण की समीक्षा नीति को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रारंभिक पांडुलिपि का मूल्यांकन

          संपादक द्वारा पहले सभी पांडुलिपियों का मूल्यांकन किया जाता है। इस स्तर पर खारिज की गई पांडुलिपियाँ दोषपूर्ण या पत्रिका के उद्देश्य और दायरे से बाहर होती हैं। न्यूनतम मानदंड  पूरा करने वाले पत्रों को सामान्य रूप से समीक्षा के लिए कम से कम 2 विशेषज्ञों के पास भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में पुनरीक्षक और लेखक दोनों के बीच पूरी तरह से गोपनीयता का पालन किया जाता है।

पुनरीक्षक को उनकी विशेषज्ञता के अनुसार पत्र भेजे जाते हैं।पुनरीक्षक निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं-

  • पत्र की मौलिकता
  • उचित नैतिक दिशानिर्देशों का पालन
  • शोध परिणाम की स्पष्टता
  • शोध संदर्भ
  • शोध पद्धति का पालन

पुनरीक्षक यदि चाहें तो पांडुलिपि में सुधार का सुझाव दे सकते हैं।

          पुनरीक्षक द्वारा दिये गए प्रतिवेदन एवं परामर्श के आधार पर पांडुलिपि को स्वीकार करने या अस्वीकार करने का निर्णय लिया जाता है।

पुनरीक्षण प्रक्रिया (Peer Review Process)

शोध-चिंतन पत्रिका संपादकों द्वारा बारीकी से निगरानी की जाती है। वैज्ञानिक मानकों को पूरा न करने वाली पांडुलिपियों को पुनरीक्षण के लिए नहीं भेजा जाता है । लेखकों से अपेक्षा की जाती है कि वे लेखकों के लिए दिये गये निर्देशों के आधार पर पाण्डुलिपि प्रस्तुत करें। संपादक मण्डल के सदस्य लेखों की पठनीयता, व्याकरणिक उपयोग आदि की जांच करते हैं और आवश्यकतानुसार लेखक को पुनःलेखन के लिए पांडुलिपियाँ भेजी जा सकती हैं।

            पाण्डुलिपियों की आपत्तिजनक टिप्पणी संपादक मण्डल के सदस्यों द्वारा रद्द की जा सकती है। पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद संपादकीय मूल्यांकन भी किया जाता है। पत्रों का पुनरीक्षण ऑनलाइन प्रक्रिया से किया जाता है। लेखकों को अपनी पांडुलिपि जमा करने के लिए ऑनलाइन प्रणाली का उपयोग करना चाहिए।

             संपादक द्वारा प्रारंभिक अनुमोदन के बाद पाण्डुलिपियों को  दो या ततोधिक पुनरीक्षकों को भेजा जाता है। पुनरीक्षक पाण्डुलिपियों की समीक्षा करते हैं और इसे वापस संपादकीय कार्यालय भेजते हैं। फिर लेखकों को अपने पक्ष के समर्थन करने या आवश्यक सुधार करने के लिए कहा जाता है। लेखक को यदि निर्देश स्वीकार्य हो, तो लेखक को अंतिम संस्करण प्रस्तुत करना होता है ।

प्रकाशन संबंधी आचार (Publication Ethics)

सहयोगी विद्वानों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया से पत्रों का प्रकाशन हम आवश्यक मानते हैं। प्रकाशन के कार्य में शामिल सभी पक्षों- लेखक, पत्रिका संपादक, संपादक मण्डल एवं परामर्श मण्डल और प्रकाशक के लिए अपेक्षित नैतिक व्यवहार के मानकों पर सहमत होना आवश्यक है। शोध-चिंतन पत्रिका COPE के सर्वोत्तम अभ्यास दिशानिर्देशों पर आधारित है।

          पुनरीक्षक संपादकीय निर्णय लेने में संपादक की सहायता करते हैं और लेखक के साथ संपादकीय संचार के माध्यम से कागज को सुधारने में लेखक की सहायता भी कर सकते हैं। लेखों में से कौन सा प्रकाशित किया जाना चाहिए- इसका अंतिम निर्णय करना संपादक की ज़िम्मेदारी होती है।

गोपनीयता

पांडुलिपि के संबंध में गोपनीयता का पालन करना संपादन से जुड़े सभी पक्षों की ज़िम्मेदारी होती है। 

साहित्यिक चोरी नीति (Plagiarism Policy)

साहित्यिक चोरी एक गंभीर उल्लंघन है। साहित्यिक चोरी विचारों, पाठ, तथ्य और अन्य रचनात्मक कार्यों के उचित उद्धरण के बिना मूल शोध के रूप में प्रस्तुत करना है। शोध-चिंतन पत्रिका उचित उद्धरण के बिना 10% नकल किए गए पत्र को प्रकाशन के लिए चयन नहीं करती।

साहित्यिक चोरी के लिए स्क्रीनिंग इस तरह की अनैतिक प्रथाओं को रोकने के लिए प्रत्येक पाण्डुलिपि की जांच  ‘उरकुंड’ (Urkund) सॉफ्टवेयर के जरिये किया जाता है।

अस्वीकरण

‘शोध-चिंतन पत्रिका’ में प्रकाशित सभी पत्रों के साथ संपादक या सम्पादन मण्डल के सदस्यों की सहमति का होना अपेक्षित नहीं है। प्रकाशित सामग्री की सत्यता एवं मौलिकता के लिए लेखक स्वयं जिम्मेदार है। पत्रिका में प्रकाशित किसी पत्र पर यदि कोई आपत्ति होती है, तो उसके विरुद्ध गौहाटी उच्च न्यायालय के अधीन ही कार्यवाही की जायेगी।

पत्रिका विवरण  
शीर्षकशोध-चिंतन पत्रिका
आवृत्तिअर्धवार्षिक
प्रकाशकNEGLIMPSE
संपादक डॉ. रीतामणि वैश्य
कॉपिराइटप्रकाशक
प्रारंभिक वर्ष2020
विषय-क्षेत्रकला एवं मानविकी
भाषाहिंदी
प्रकाशन प्रारूपऑनलाइन
ई-मेलshodhchintan@gmail.com
मोबाइल न॰+919101452787, +919435116133
वेबसाइटhttp://shodhchintanpatrika.neglimpse.com/
पता    गृह संख्या:102(बी) गणेश नगर, वशिष्ठ, गुवाहाटी, कामरूप(शहर),असम, पिन: 781029